सोमवार, 7 जून 2010

शिलाजीत

विविध रोगानुसार प्रयोग
१).शुद्ध शिलाजीत को त्रिफला (हर्र , बहेड़ा ,आंवला ) और शहद के साथ सेवन से प्रमेह का नाश होता है।
२).शुद्ध शिलाजीत  को १ तोला मधु सोंठ १/२ तोला ,और १ पाव दूध के साथ सेवन करने से गठिया वाय में लाभ।
३). त्रिफला १ तोला एवं दूध के साथ शिलाजीत सेवन से कुष्ठ रोग में आराम मिलता है।
४). शिलाजीत, मुलहटी का सत १/२ तोला एवं गाये का दूध के साथ सेवन से मिर्गी रोग में लाभ होता है।
५).शिलाजीत , त्रिकुट और स्वर्णमाक्षिक भस्म के साथ सेवन से विष दूर होता है।
६).शिलाजीत माखन के साथ खाने से मस्तिस्क पुष्ट होता है।
७). शरीर शोधन के पश्चात यदि शिलाजीत को गुडूची क्वाथ से सेवन करें तो वात रक्त कुष्ट में लाभ होता है।
८). शिलाजीत कमजोरी में दूध के साथ सेवन करें। 
९). १ तोला गौ मूत्र के साथ शिलाजीत मधुमेह में प्रयोग करें।
१०).नपुंसकता मे शिलाजीत आधा सेर गौ दुग्ध के साथ सेवन करें।
११). धातु क्षी ... में मिश्री मिला कर दूध के साथ सेवन करें ।
१२). मुलहटी के काड़े के साथ यदि शिलाजीत का प्रयोग करें तो रक्त पित का नाश करता है ।
१३). छोटी इलाइची और पीपल चूर्ण के साथ बलानुसार सेवन करें तो मूत्र कृच, मूत्रअवरोध,प्रमेह रोग दूर होते हैं।
१४). यह अनेक प्रकार की औषधियों में प्रयोग होता है जैसे चंद्रप्रभा वटी, शिलाजीत वटी आदि।
१५). असाध्य मधुमेह रोगी यदि पथ्यानुसार नियम पूर्वक ४०० तोले शिलाजीत प्रयोग करें तो उसका चोला नया हो     जाता है जिसे वाग्भट कहते हैं .....
मधुमेह्त्वमापन्नी  भिशगिभः परिवर्जितः।
शिलाजतु तुलानधयत प्रमेह्हर्तः पुनर्नवः ।।

                                         वैध श्री रामशंकर पाठक ' दीनबंधु चिकित्सालय ' द्वारा लिखित नुक्से 'शेष '....
धनबाद