पूरा ब्रहमांड कैसे बना होगा यह कौतूहल का विषय, जब हम सुदूर आकाश की ओर अँधेरी रात में देखते हैं तो चारो दिशाओं में कालिमा द्रष्टिगोचर होती है जो थोड़ी बहुत रोशनी नजर आती है वह हम तारों की कृपा से देख पाते हैं यदि तारे भी न हों तो हम कुछ भी नहीं देख सकते ( आप अकेले किसी बंद कमरे में रात को सारी बत्तियां बंद करके, बिना किसी बाहरी ध्वनी को सुने आप आंखे खोलकर देखने की कोशिश करें तथा सोंचे की सारे संसार से रौशनी विलुप्त हो चुकी है तब जो अनुभव आपको होगा वह कितना डरावना होगा ) जबकि चन्द्रमा से मिलने वाली रौशनी परावर्तित होकर आती है जैसे सूर्य को आइना दिखाने पर परावर्तित रोशनी दीवार पर दिखाई पड़ती है /
संसार में जो हरियाली,जंगल, खेत, जीव-जंतु , मानव, विज्ञानं, अविष्कार आदि रौशनी के कारण ही संभव हुआ यदि यह न होती तो कुछ भी न होता ( आज संसार के वैज्ञानिक ब्रह्माण्ड की शुरुआत कैसे हुई इसकी खोज में लगे हुए हैं तथा 'लार्ज हैड्रॉन कोलाइडर’ बिग बैंग नामक शीर्षक जिसमें नयूट्रोंस को टकराकर उत्पन्न उर्जा के द्वारा ब्रह्माण्ड रचना का पता लगाना ) हमारे पूर्वज ऋषि मुनियों ने रौशनी के महत्व पहले ही समझ लिया था तथा यह भी पता कर लिया था की कौन कौन से वृक्ष किन औषधियों में प्रयोग कर सकते है क्यूँकी प्रत्येक वृक्ष सूर्य की किरणों के अलग अलग रंगों को अवशोषित करता है .................क्रमशः
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