गुरुवार, 17 फ़रवरी 2011

श्वित्र कुष्ठ की बीमारी (कोढ़)

                  ( कुष्ठ )
1.बावची के तेल की 10 बून्दे बताशे में डालकर कुछ दिनों तक रोजाना सेवन करने से श्वित्र रोग में 
   लाभ मिलता है। 
3.बावची, हल्दी, अर्कमूल त्वक् (आक की जड़ का चूर्ण) को बराबर मात्रा में लेकर बारीक चूर्ण करके
   कपडे़ से छानकर लें। इस चूर्ण को गाय के पेशाब या सिरके में पीसकर श्वित्र के दागों पर लगाने से 
   सफेद दाग   समाप्त हो जाता है। यदि लेप उतारने पर जलन हो जो तुबरकादि तेल लगायें।
4. दो  भाग बावची, 1-1 भाग नीला थोथा तथा सुहागा लेकर कपड़े में छानकर चूर्ण बनाकर एक 
    सप्ताहतक भांगरे  के रस में घोंटकर रख लें। इसको नींबू के रस में मिलाकर श्वित्र पर लगाने से 
   सफेद दाग नष्ट हो जाते हैं। इसका प्रयोग तेज है, अत: इसके प्रयोग के फलस्वरूप छाले होने पर 
   यह प्रयोग बंद कर दें। 
5.बावची के चूर्ण को अदरक के रस में घिसकर लेप करने से श्वित्र रोग समाप्त हो जाता है। 
6.बावची, अजमोद, पवांड तथा कमल गट्टा को बराबर मात्रा में लेकर पीसकर इसमें शहद मिलाकर 
   गोलियां   बना लें। यह 1-2 गोली सुबह और शाम अंजीर की जड़ के काढे़ के साथ सेवन करने से
   सफेद कुष्ठ दूर होता है। 
7.बावची, गेरू और गन्धक को बराबर मात्रा में लेकर पीसकर अदरक के रस में मिलाकर 10-10 ग्राम 
  की टिकिया बनाकर, एक टिकिया रात को लगभग 1 ग्राम का चौथा भाग पानी में डाल दें। इसे सुबह 
  खाकर ऊपर से साफ पानी को पी लें तथा नीचे बची हुई औषधि को सफेद दागों पर मालिश कर धूप में
  सेकने से श्वित्र कोढ़ समाप्त होता है।  
8.सुखाकर और पीसकर चूर्ण बना लें। इसमें से 5 ग्राम चूर्ण को 21 दिन तक पानी के साथ खाने से कुष्ठ 
   (कोढ़) रोग ठीक हो जाता है।
9. छ ग्राम भांगरा और बकुची का चूर्ण पानी के साथ 21 दिनों तक खायें और पानी में पीसकर कोढ़ 
   पर लेप करने से यह रोग जड़ से खत्म हो जाता है। जितने दिन इस चूर्ण का सेवन करें उतने दिन 
   नमक बिल्कुल न खायें।
10.बावची के बीज 4 भाग और 1 भाग तबकिया हस्ताल, का चूर्ण बनाकर गाय के पेशाब में घोंटकर 
     सफेद दागों पर लगाने से सफेद दाग में लाभ होता है।
11.बावची और पवाड़ को बराबर मात्रा में लेकर सिरके में पीसकर सफेद दागों पर लगाने से सफेद दाग में
     लाभ मिलता है
12.बावची, गन्धक व गुड़मार को बराबर मात्रा में लेकर तीनों का चूर्ण बना लें तथा 12 ग्राम चूर्ण को रात में 
    पानी में भिगों दें। इसे सुबह साफ पानी से पीने से तथा नीचे के तल में जमा पदार्थ श्वेत दागों पर लगाते 
     रहने से सफेद कोढ़ समाप्त होता है।
13. दो भाग बावची का तेल, 2 भाग तुवरक तेल में, चंदन के तेल का एक भाग मिलाकर रख लें, इस तेल 
      के लगाने से सामान्य चर्म रोग तथा सफेद कोढ़ ठीक होता है
14.एक ग्राम शुद्ध बावची में आंवले या खैर त्वक (चूर्ण या बारीक पीस हुआ) के लगभग 1 ग्राम का चौथा 
     भाग काढ़े के साथ सेवन करने से श्वित्र (कोढ़) रोग समाप्त हो जाता है।
15.बावची, कलौंजी और धतूरे के बीज को बराबर मात्रा में लेकर आक के पत्तों के रस में पीसकर सफेद दागों 
     पर लगाने से सफेद कुष्ठ समाप्त हो जाता है।
16.बावची के थोड़े से बीज और खाने वाला तिल बराबर मात्रा में लेकर पीस लेते हैं। इस चूर्ण को एक
     चम्मच  ठंडे पानी से सुबह-शाम एक साल तक लगातार सेवन करने से सफेद दाग में पूरा लाभ होता है।
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2 टिप्‍पणियां:

  1. आपके ब्लॉग पर आकर अच्छा लगा , आप हमारे ब्लॉग पर भी आयें. यदि हमारा प्रयास आपको पसंद आये तो "फालोवर" बनकर हमारा उत्साहवर्धन अवश्य करें. साथ ही अपने अमूल्य सुझावों से हमें अवगत भी कराएँ, ताकि इस मंच को हम नयी दिशा दे सकें. धन्यवाद . हम आपकी प्रतीक्षा करेंगे ....
    भारतीय ब्लॉग लेखक मंच
    डंके की चोट पर

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  2. अनवर भाई व् अन्य ने जो शिवजी या हिन्दू के बारे में जो कहा सो कहा लेकिन उनका लिंग के बारे में यह कहना की यह बच्चे पैदा करने व् नित्य क्रिया के की लिए है बांकी बेकार का है उन्हें पता होना चाहिए जिसका ये बेकार हो जाता है उसकी संसार में क्या हैसियत होती है, जबकि १४०० सौ साल पहले लिंग के लिए व् लिंग से सम्बंधित एक नए संसार का जन्म हुआ और आज संसार में वहां वहां क्या हो रहा है..... इन्हें शर्म आनी चाहिए हजारों वर्ष पुराणी संस्कृत व् धर्म के बारे में यह कहना ...बांकी बी एन शर्मा का //bhandafodu.blogspot.com

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