अंडकोष का जल सुख पूर्वक निकालने का उपाय मुठी भर इमली की पत्ती लाकर किसी मिटटी के पात्र में रख कर इतना "गो मूत्र " डालें की पत्ती डूब जाये तथा आग पर रख दें / जब गो मूत्र कम हो जाये पुनः ही उतना गोमूत्र डालकर औटाये / इस प्रकार ३ बार गोमूत्र डालकर औटाये , बाद में गर्म गर्म पत्तियों को निकल कर किसी बरगद या अरंडी के पत्ते पर पत्तियों को रख कर बांध दें ,उपर से कपडे की पत्ती बांध दें , फिर लंग्गोट बांध लें , यह क्रिया रात्रि को करें / इस तरह ७-१४ दिन या २१ दिन बंधने से कठिन से कठिन अंडवृद्धि का जल निकलकर पूर्ववत नरम हो जायेंगे / १०२
नोट :- अंडकोष यदि कद्दू के सामान भारी हो तब उपरोक्त विधि से ही कार्य करें, सिर्फ दवा औताते समय बफारा विधि अपनाते अनुसार चारपाई पर बैठ कर उस मिटटी के पात्र पर जिसमें पत्तियां औटती हैं एक कीप टीन की रख कर अंडकोशों पर बफारा लेते रहे , बाद में पत्ती सुहाती सुहाती बांध उपरोक्त विधि अनुसार लंग्गोट कस लिया जाये, इससे वृषण पर किसी प्रकार का अहित परिणाम न होगा और बगैर शस्त्र क्रिया के आराम हो जायेगा /
-- श्रीयुत पंo श्री कृष्ण चन्द्र जी त्रिपाठी /
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